सर्दी पर शेर

सर्दी का मौसम बहुत रूमान-पर्वर होता है। इस में सूरज की शिद्दत और आग की गर्मी भी मज़ा देने लगती है।

ये सर्द रात ये आवारगी ये नींद का बोझ हम अपने शहर में होते तो घर गए होते

कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तिरा ख़याल भी दिल को ख़ुशी के साथ साथ होता रहा मलाल भी

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अब उदास फिरते हो सर्दियों की शामों में इस तरह तो होता है इस तरह के कामों में

जब चली ठंडी हवा बच्चा ठिठुर कर रह गया माँ ने अपने ला'ल की तख़्ती जला दी रात को

मिरे सूरज आ! मिरे जिस्म पे अपना साया कर बड़ी तेज़ हवा है सर्दी आज ग़ज़ब की है

रात बेचैन सी सर्दी में ठिठुरती है बहुत दिन भी हर रोज़ सुलगता है तिरी यादों से

मिरे सूरज आ! मिरे जिस्म पे अपना साया कर बड़ी तेज़ हवा है सर्दी आज ग़ज़ब की है

रात बेचैन सी सर्दी में ठिठुरती है बहुत दिन भी हर रोज़ सुलगता है तिरी यादों से

मिरे सूरज आ! मिरे जिस्म पे अपना साया कर बड़ी तेज़ हवा है सर्दी आज ग़ज़ब की है

रात बेचैन सी सर्दी में ठिठुरती है बहुत दिन भी हर रोज़ सुलगता है तिरी यादों से

मिरे सूरज आ! मिरे जिस्म पे अपना साया कर बड़ी तेज़ हवा है सर्दी आज ग़ज़ब की है

रात बेचैन सी सर्दी में ठिठुरती है बहुत दिन भी हर रोज़ सुलगता है तिरी यादों से

मिरे सूरज आ! मिरे जिस्म पे अपना साया कर बड़ी तेज़ हवा है सर्दी आज ग़ज़ब की है

रात बेचैन सी सर्दी में ठिठुरती है बहुत दिन भी हर रोज़ सुलगता है तिरी यादों से

वो सर्दियों की धूप की तरह ग़ुरूब हो गया लिपट रही है याद जिस्म से लिहाफ़ की तरह

गर्मी लगी तो ख़ुद से अलग हो के सो गए सर्दी लगी तो ख़ुद को दोबारा पहन लिया

रात बेचैन सी सर्दी में ठिठुरती है बहुत दिन भी हर रोज़ सुलगता है तिरी यादों से